अगले वित्त वर्ष में भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस तटीय रक्षा सौदे पर अंतिम मुहर लगना तय, चीन के खिलाफ एक मजबूत सैन्य कदम
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र में चीन की दादागिरी को करारा जवाब देने के लिए अब इंडोनेशिया भी भारत के 'ब्रह्मोस' क्रूज मिसाइल सिस्टम (BrahMos Coastal Defence System) का मुरीद हो गया है।
नई दिल्ली और जकार्ता के बीच बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है और अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में ही इस ऐतिहासिक तटीय रक्षा सौदे पर अंतिम हस्ताक्षर होने की पूरी उम्मीद है।
क्या है यह डील और इंडोनेशिया की रणनीति?
शुरुआती समझौते के तहत, इंडोनेशिया भारत से एक 'ब्रह्मोस कोस्टल डिफेंस बैटरी' खरीदेगा। भविष्य में बजट और सैन्य जरूरतों के हिसाब से इसे और बढ़ाया जाएगा।
अगर आप सोच रहे हैं कि इंडोनेशिया को अचानक इसकी जरूरत क्यों पड़ गई, तो इसका सीधा जवाब है— चीन का आक्रामक रवैया।
इंडोनेशिया एक विशाल द्वीपीय देश है। इसके उत्तर में 'नॉर्थ नटुना सागर' है, जहां चीन अपने मनगढ़ंत 'नाइन-डैश लाइन' (Nine-Dash Line) के जरिए घुसपैठ और समुद्र पर अवैध दावा करने की कोशिश करता रहता है।
ऐसे में अपने तटीय क्षेत्रों को सुरक्षित रखने और चीनी नौसेना को अपनी हद में रखने के लिए इंडोनेशिया को एक 'ब्रह्मास्त्र' की जरूरत थी, और ब्रह्मोस से बेहतर विकल्प दुनिया में कोई और है ही नहीं!
क्या होती है 'ब्रह्मोस कोस्टल डिफेंस बैटरी'?
अक्सर लोग सोचते हैं कि मिसाइल खरीद ली मतलब काम खत्म। लेकिन सैन्य भाषा में 'बैटरी' का मतलब कोई सेल या इनवर्टर की बैटरी नहीं होता, बल्कि यह हथियारों और उपकरणों का एक पूरा 'स्मार्ट और चलता-फिरता किला' होता है। फिलिपींस को जो सिस्टम दिया गया है, इंडोनेशिया का सिस्टम भी लगभग वैसा ही होगा।
एक बैटरी में ये चीजें शामिल होती हैं:
दुश्मनों के लिए काल क्यों है ब्रह्मोस?
भारत के DRDO और रूस के NPO Mashinostroyenia द्वारा मिलकर बनाई गई यह मिसाइल दुनिया की सबसे खतरनाक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है।
इसकी कुछ खूबियां इसे अजेय बनाती हैं:
भारत के लिए इसका क्या मतलब है?
जनवरी 2022 में भारत ने फिलिपींस के साथ 375 मिलियन डॉलर का ब्रह्मोस समझौता किया था, जिसकी डिलीवरी भी शुरू हो चुकी है।
अब इंडोनेशिया के रूप में एक और दक्षिण-पूर्व एशियाई देश का भारतीय हथियारों पर यह भरोसा दिखाता है कि भारत अब ग्लोबल डिफेंस मार्केट का एक उभरता हुआ निर्यातक बन चुका है।
यह डील न केवल कूटनीतिक रूप से भारत को मजबूत करेगी, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने में भी एक 'गेम-चेंजर' साबित होगी।
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