भारतीय वायुसेना के MTA प्रोग्राम की तैयारियां तेज: C-390, A400M और अपग्रेडेड C-130J के बीच कड़ा मुकाबला, 'हाई-ऑल्टिट्यूड' प्रदर्शन होगा निर्णायक
भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी सामरिक एयरलिफ्ट क्षमता को और अधिक घातक और आधुनिक बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
वायुसेना के बहुप्रतीक्षित 'मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट' (MTA) प्रोग्राम के लिए जल्द ही औपचारिक 'रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल' (RFP) जारी होने की उम्मीद है। इसके तुरंत बाद, दुनिया के सबसे बेहतरीन सैन्य ट्रांसपोर्ट विमानों के तकनीकी मूल्यांकन और कड़े ट्रायल्स का दौर भारत की सरज़मीं पर शुरू होगा।
लगभग ₹1 लाख करोड़ के इस विशालकाय सौदे के तहत, वायुसेना अपने पुराने पड़ चुके सोवियत युग के एंतोनोव An-32 और इल्यूशिन Il-76 बेड़े को बदलना चाहती है।
वायुसेना को ऐसे 60 से 80 नए विमानों की तलाश है, जो न सिर्फ आधुनिक हों, बल्कि 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत देश में ही बनाए जाएं।
मैदान में तीन दिग्गज और 'आत्मनिर्भर भारत' का संकल्प
इस ऐतिहासिक मुकाबले में दुनिया के तीन सबसे शक्तिशाली एविएशन प्लेटफॉर्म आमने-सामने हैं।
इस पूरी प्रक्रिया को भारत के domestic defence (घरेलू रक्षा) इकोसिस्टम से जोड़ने के लिए इन विदेशी कंपनियों ने प्रमुख भारतीय घरानों से हाथ मिलाया है:
चूंकि C-390 और A400M वर्तमान में वायुसेना के बेड़े का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए एम्ब्रेयर और एयरबस को अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने के लिए ये विमान भारत लाने होंगे।
वहीं, C-130J के साथ वायुसेना का पहले से ही शानदार परिचालन अनुभव रहा है, इसलिए इसके अपग्रेडेड वर्जन के ट्रायल्स की प्रक्रिया एकदम नए विमानों की तुलना में थोड़ी अलग हो सकती है।
चुनौतीपूर्ण ट्रायल्स: युद्ध के असली हालात और 'ज़ोरावर' टैंक का फैक्टर
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय वायुसेना इन विमानों का टेस्ट बिल्कुल असली युद्ध जैसी परिस्थितियों (Real Battlefield Conditions) में करेगी।
इसमें सबसे अहम होगा 'हाई-ऑल्टिट्यूड' (अधिक ऊंचाई) और भीषण गर्मी वाले पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी सेक्टरों में इनका प्रदर्शन।
सैन्य उड्डयन (Military Aviation) की तकनीक को समझें तो, ऊंचाई वाले इलाकों (जैसे लद्दाख) में हवा पतली हो जाती है। पतली हवा के कारण विमान के इंजन को कम ऑक्सीजन मिलती है, जिससे उसका 'थ्रस्ट' (धक्का) घटता है और पंखों को कम 'लिफ्ट' (उठाव) मिलती है।
ऐसी दुर्गम परिस्थितियों में छोटे और बिना पक्की सड़क वाले रनवे से भारी वजन के साथ सुरक्षित उड़ान भरना एक बहुत बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इन ट्रायल्स के दौरान विमानों में डमी (नकली) कार्गो लोड रखा जाएगा।
इसके पीछे एक बड़ी रणनीतिक वजह भारत का नया 25-टन का स्वदेशी 'ज़ोरावर' (Zorawar) लाइट टैंक भी है। वायुसेना की प्राथमिकता एक ऐसा विमान चुनना है जो इस टैंक और अन्य भारी हथियारों को सीधे दौलत बेग ओल्डी (DBO) जैसे सीमावर्ती एडवांस लैंडिंग ग्राउंड्स तक आसानी से पहुंचा सके।
इन पैमानों पर होगी कड़ी परख
ट्रायल्स के दौरान वायुसेना मुख्य रूप से इन मापदंडों का मूल्यांकन करेगी:
यह केवल कुछ ट्रांसपोर्ट विमानों को खरीदने का सौदा नहीं है, बल्कि यह भारत की सामरिक पहुंच को मजबूत करने और देश को ग्लोबल डिफेन्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।
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