नई LRLACM क्रूज़ मिसाइल से लैस होगा भारत का सुखोई-30MKI बेड़ा, हवा से ज़मीन पर अचूक मार करने की उन्नत क्षमता
भारत की लंबी दूरी की अचूक मारक क्षमता अब एक नए और बेहद खतरनाक मुकाम पर पहुँचने वाली है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अपनी अत्याधुनिक 'लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज़ मिसाइल' (LRLACM) के 'हवा से लॉन्च' (Air-Launched) होने वाले संस्करण को तैयार करने के अंतिम चरण में कदम रख दिया है।
हाल ही में, नवंबर 2024 में इस मिसाइल के ज़मीनी संस्करण का ओडिशा के तट से सफल परीक्षण किया गया था।
अब इसके हवाई संस्करण को भारत के सबसे भरोसेमंद लड़ाकू विमान सुखोई-30MKI (Su-30MKI) के साथ जोड़ने (Integration) का काम जोरों पर चल रहा है।
इस साल के अंत तक इसके कैप्टिव कैरिज ट्रायल (विमान के नीचे मिसाइल लगाकर उड़ान भरना) शुरू होने की उम्मीद है।
तकनीक का सरलीकरण: कैसे काम करेगी यह मिसाइल?
इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का नेतृत्व DRDO की 'एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट' (ADE) प्रयोगशाला कर रही है।
यह मिसाइल भारत के स्वदेशी 'निर्भय' (Nirbhay) क्रूज़ मिसाइल परिवार का अगला और सबसे उन्नत रूप है।
इस मिसाइल की तकनीक को समझना बेहद दिलचस्प है:
रणनीतिक बढ़त: ब्रह्मोस के साथ एक अचूक जोड़ी
भारत के पास पहले से ही ब्रह्मोस जैसी खूंखार सुपरसोनिक मिसाइल है, जो पलक झपकते ही दुश्मन के ठिकानों को तबाह कर देती है। लेकिन तेज़ गति के कारण उसकी रेंज थोड़ी सीमित होती है।
वहीं, LRLACM एक सबसोनिक (Subsonic) मिसाइल है। यह ब्रह्मोस की तुलना में धीमी ज़रूर है, लेकिन इसकी मारक क्षमता बहुत लंबी है (लगभग 1,000 किलोमीटर से अधिक)।
यह मिसाइल दुश्मन के रडार से बचने के लिए "टेरेन-हगिंग" (Terrain-hugging) तकनीक का इस्तेमाल करती है, यानी यह पहाड़ों, घाटियों और ज़मीन की सतह से बिल्कुल सटकर उड़ती है। इससे दुश्मन के एडवांस रडार भी इसे पकड़ नहीं पाते। ब्रह्मोस और LRLACM एक दूसरे की जगह नहीं लेंगे, बल्कि एक-दूसरे के पूरक बनकर भारतीय सेना को अजेय बनाएंगे।
वायुसेना के लिए 'स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक' की ताकत
इस मिसाइल के वायुसेना में पूरी तरह शामिल होने से भारतीय फाइटर जेट्स को 'स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक' (Stand-off Strike) की क्षमता मिल जाएगी।
इसका सीधा अर्थ यह है कि हमारे पायलट दुश्मन देश के खतरनाक हवाई क्षेत्र में घुसे बिना ही, अपने सुरक्षित आसमान से ही उनके कमांड सेंटर, एयरबेस, रडार स्टेशन या लॉजिस्टिक्स हब को मटियामेट कर सकेंगे।
सस्ते दाम, भारी तबाही और भविष्य की योजनाएँ
सुखोई के बाद, भविष्य में इस हल्की मिसाइल को स्वदेशी तेजस मार्क-2 (Tejas Mk2) और संभवतः राफेल (Rafale) जैसे लड़ाकू विमानों पर भी तैनात करने की योजना है।
ऑपरेशनल नज़रिए से देखें तो सुपरसोनिक मिसाइलों की तुलना में इस मिसाइल की लागत कम होगी।
यह भारतीय वायुसेना को युद्ध की स्थिति में 'सैचुरेशन अटैक' (Saturation Attack) की सुविधा देगी—यानी एक साथ झुंड में इतनी मिसाइलें दागना कि दुश्मन का डिफेंस सिस्टम भ्रमित हो जाए।
इस रणनीति के ज़रिए चीन के HQ-9 और S-300 जैसे आधुनिक और बहुचर्चित एयर डिफेन्स सिस्टम भी पूरी तरह से बेबस हो जाएंगे, क्योंकि उनके पास भी एक समय में आने वाले खतरों को रोकने की क्षमता सीमित होती है।
यह मिसाइल न केवल भारतीय सीमाओं को अभेद्य बनाएगी, बल्कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी एक नई उड़ान देगी।
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