आधुनिक हवाई युद्ध के इस बदलते दौर में, जहाँ 'स्टेल्थ' (रडार की पकड़ में न आने वाली तकनीक) ही आसमान की असली सिकंदर है, भारत का 'घातक' (Ghatak UCAV) भारतीय वायुसेना के लिए एक बहुत बड़ा गेम-चेंजर साबित होने वाला है।
DRDO द्वारा तैयार किया जा रहा यह मानवरहित लड़ाकू विमान (ड्रोन) दुश्मनों के लिए एक कड़ा संदेश है। चीन जहाँ अपने 5वीं पीढ़ी के J-20 फाइटर जेट्स तैनात कर रहा है और 6वीं पीढ़ी के हथियारों (जैसे लॉयल विंगमैन ड्रोन) पर काम कर रहा है, वहीं भारत को सीमाओं पर अपना दबदबा बनाए रखने के लिए ऐसे ही अचूक हथियारों की जरूरत है।
'घातक' वो स्वदेशी ब्रह्मास्त्र है जो बिना किसी पायलट की जान जोखिम में डाले, दुश्मन के गढ़ में तबाही मचाने का दम रखता है।
रडार की नज़रों से ओझल: फ्लाइंग-विंग डिज़ाइन
घातक का 'फ्लाइंग-विंग' डिज़ाइन इसे सचमुच में अदृश्य बनाता है। आसान भाषा में समझें तो, इसमें आम विमानों की तरह कोई पूंछ (tail) या धड़ (fuselage) नहीं होता।
इस तकनीक की बदौलत यह दुश्मन के रडार, कमांड सेंटर या अहम ठिकानों को तबाह करने के लिए 'डीप-स्ट्राइक' मिशन आसानी से अंजाम दे सकता है।
इसे सुखोई-30MKI, तेजस या भविष्य के AMCA के साथ एक वफादार साथी (MUM-T) की तरह टीम बनाकर ऑपरेट किया जा सकेगा।
तेजस के बराबर आकार, लेकिन क्षमता कहीं ज़्यादा
आकार में यह HAL तेजस के ही बराबर है, लेकिन इसके काम करने की क्षमताएँ हैरान करने वाली हैं:
हथियारों का जखीरा और 'गांडीव' की मार
स्टेल्थ होने के बावजूद 'घातक' 1.5 टन तक के हथियारों को अपने अंदर छिपाकर ले जा सकता है।
इसमें हवा-से-जमीन पर मार करने वाले हथियारों के अलावा, सबसे अहम है लंबी दूरी की हवा-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलों का इंटीग्रेशन।
F-35 जैसे सेंसर्स और AI का दिमाग
घातक की सबसे बड़ी खूबी इसके आधुनिक सेंसर्स हैं, जैसे 'डिस्ट्रिब्यूटेड अपर्चर सिस्टम' (DAS)।
यह तकनीक बिल्कुल अमेरिका के F-35 फाइटर जेट जैसी है। यह बिना रडार तरंगे छोड़े (ताकि दुश्मन को भनक न लगे) विमान को 360-डिग्री देखने की ताकत देती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस यह UCAV खुद से लक्ष्य पहचानने, हवा में जटिल युद्धाभ्यास करने और टक्कर से बचने के फैसले लेने में पूरी तरह सक्षम है।
2026 का ताज़ा अपडेट और आगे की राह
हालिया ओपन-सोर्स रिपोर्ट्स (मार्च 2026) के अनुसार, इस प्रोग्राम ने काफी रफ़्तार पकड़ ली है:
चीन की बढ़ती ताकत को देखते हुए, भारत का 'घातक' एक कॉस्ट-इफेक्टिव और अचूक समाधान है। यह भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।
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